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आईबीएस (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम)

इसके लक्षण और समाधान है

इसके लक्षण और इलाज इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक कंडीशन का नाम है जो
बड़ी आंत को प्रभावित करता है और पेट दर्द, सूजन और बाउल हैबिट्स में
बदलाव जैसे लक्षणों का कारण बनता है।

आईबीएस (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम)

आईबीएस का क्या कारण है?

  • आईबीएस का सही कारण पता नहीं है।
  • कुछ लोगों में यह दस्त जैसे पेट के इन्फ़ेक्शन के बाद शुरू होता है, ऐसा शायद आंत के अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने के कारण होता है |
  • यह गट की मांसपेशियों के समन्वय (कोओर्डिनेशन) में असंतुलन (इमबैलेंस) के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता है
  • कुछ लोगों के लिए हार्मोन इशूज़ भी एक कारण हो सकते हैं
  • नर्वस सिस्टम में असंतुलन भी इस स्थिति का कारण बन सकता है

किन लोगों को आईबीएस होने की संभावना ज़्यादा होती है?

  • 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में आईबीएस विकसित होने की संभावना ज़्यादा होती है।
  • पारिवारिक इतिहास की भी भूमिका होती है
  • चिंता, शारीरिक, मानसिक या यौन शोषण जैसी मानसिक स्थितियों का इतिहास।

आईबीएस के क्या लक्षण हैं?

  • आईबीएस आमतौर पर पेट दर्द और सूजन का कारण बन सकता है।
  • इसके कारण ओल्टर्ड बाउल हैबिट भी हो सकती है।
  • कोंस्टीपेशन के कारण हेम्ब्रेज हो सकता है जिसकी वजह से स्टूल में खून आसकता है
  • दस्त के बार-बार होने के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन हो सकता है।
  • स्टूल भी रिबन की तरह या पानी में बदल सकते हैं |

आईबीएस का इलाज कैसे किया जाता है?

  • क्योंकि आईबीएस को डाईग्नोज़ करने के लिए कोई निश्चित परीक्षण नहीं है, आपका डॉक्टर आपकी स्थिति की डिटेल में जांच करके इस कंडीशन का इलाज कर सकता है, जिसमें ट्रिगर और जीवनशैली फैक्टर्स भी भूमिका निभा सकते हैं।
  • समान लक्षण पैदा करने वाली अन्य स्थितियों का पता लगाने के लिए और आपकी छोटी आंत की अंदरूनी जाँच के लिए ग्लूटन इन्टोलरेंस, स्टूल टेस्ट, सिग्मायोडोस्कोपी और सीटी स्कैन जैसे परीक्षण किए जा सकते हैं |

आईबीएस का प्रबंध कैसे किया जाता है?

  • आईबीएस को मैनेज करने के लिए ड्रग थेरेपी के कम्बाईन दृष्टिकोण के साथ-साथ जीवनशैली के बारे में सीखने और सलाह की आवश्यकता होती है |
  •  काउंसलिंग से स्ट्रेस मेनेजमेंट में मदद मिल सकती है |
  •  बायोफीडबैक और प्रोग्रेसिव मसल रिलेक्सेशन वह तकनीकें हैं जो तनाव होने पर शरीर को रिलेक्स करवाने में मदद करते हैं |
  • आईबीएस का मेडिकल इलाज आपके द्वारा अनुभव किए जाने वाले लक्षणों के प्रकार पर निर्भर करता है |
  • लोप्रामायिड जैसी एंटी-डाईरियल दवाइयां डाईरिया को कंट्रोल करने में मदद करती हैं |
  • डिसाईक्लोमायिन नामक दवा से पेट में होने वाली दर्दनाक ऐंठन को कम किया जा सकता है | इनकी वजह से कई बार कौंसटीपेशन,और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्या हो जाती है | इसलिए केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा लें |
  • कौंसटीपेशन के लिए, आपका डॉक्टर मैग्नीशिया के दूध जैसे लेक्सेटिव की सलाह दे सकता है |
  • कभी-कभी आईबीएस के लक्षण एंटी डिप्रेसेंट दवाइयों से ठीक हो जाते हैं | विभिन्न एंटी-डिप्रेसेंट जैसे ट्राइसाइक्लिक एंटी-डिप्रेसेंट (इमिप्रामाइन या नॉर्ट्रिप्टिलाइन) या एसएसआरआई एंटीडिप्रेसेंट्स (प्रोज़ैक या पैक्सिल) से मदद मिल सकती है | इनके कारण कभी-कभी नींद आना या धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इन्हें डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन के अनुसार लें |
  • कुछ दवाएं कोलोन को रिलेक्स करने में मदद करती हैं। अलोसट्रोंन एक ऐसी दवा है और इसका उपयोग केवल उन महिलाओं के लिए किया जाता है जिन्हें आईबीएस के कारण गंभीर दस्त होता है |
  • रिफक्सिमीन एक एंटीबायोटिक है जो बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करता है और दस्त को नियंत्रित करता है।
  • ल्यूबिप्रोस्टोन इंटेंसटाईन में सेक्रेशन को बढ़ाता है और जिन महिलाओं को कौंसटीपेशन होता है उन्हें दी जाती है |

आईबीएस होने से रोकने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?

नीचे बताई गई निम्नलिखित समस्याओं से आईबीएस बाउट ट्रिगर हो सकता है |

  • जिन लोगों में आईपीएस होने की संभावना ज्यादा होती है उनमें डेयरी प्रोडक्ट्स, गेहूं, बींस, पत्ता गोभी और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसे खाने की चीजें इसे ट्रिगर कर सकती हैं |
  • महिलाओं में पीरियड्स के समय इसके लक्षण और भी गंभीर हो जाते हैं |
  • आईबीएस बाउट के लिए तनाव भी ट्रिगर साबित हो सकता है |
  • योगा और मेडिटेशन जैसी तनाव को नियंत्रित करने वाली तकनीकों के इस्तेमाल करने से भी आईबीएस बाउट को कंट्रोल करने में मदद हो सकती है | हम किसी भी इलाज की शुरुआत मेडिकल सुपरविज़न में करने की सलाह देते हैं |

हम किसी भी इलाज की शुरुआत मेडिकल सुपरविज़न में करने की सलाह देते हैं |  

सोर्सेज़

https://www.webmd.com/ibs/guide/digestive-diseases-irritable-bowel-syndrome

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmedhealth/PMHT0024780