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बाँझपन (इनफर्टिलिटी)

प्र. बाँझपन (इनफर्टिलिटी) क्या है?

बाँझपन को 12 महीनों के नियमित असुरक्षित सेक्सुअल इंटरकोर्स (संभोग) के बाद क्लिनिकल प्रेगनेंसी (नैदानिक गर्भावस्था) को हासिल करने में एक विफलता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। बाँझपन आमतौर पर 30 साल से कम उम्र के जोड़ों में देखा जाता है। बाँझपन कभी भी पुरुष या महिला की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी चिंता है जिसका सामना कपल (दंपति) एक साथ करता है। आंकड़ों के अनुसार – पुरुष शरीर के 40 प्रति शत मुद्दे बाँझपन का कारण बनते हैं, महिला शरीर के मुद्दे 40 प्रति शत बाँझपन का कारण बनते हैं, दोनों (पुरुष और महिला) 10 प्रति शत का कारण बनते हैं, जहाँ दोनों के मुद्दे कुल बाँझपन में 10 प्रति शत योगदान करते हैं, 10 प्रति शत बाँझपन का कोई कारण नहीं है या अभी भी अस्पष्ट है।

कोई भी एकल टेस्ट बाँझपन की पुष्टि नहीं करता है; डॉक्टर आमतौर पर बाँझपन की पुष्टि करने से पहले कई सारे टेस्ट्स करते हैं।

प्र. बाँझपन की लागत क्या है?

बाँझपन की पुष्टि करने के लिए बेसिक टेस्ट्स महंगे नहीं हैं। एक ट्यूब टेस्ट की लागत आमतौर पर 1200-1500 रुपये होती है, सीमेन एनालिसिस (वीर्य विश्लेषण) 200-5000 रुपयों में होता है, लेप्रोस्कोपी और हिस्टेरेक्टॉमी की लागत लगभग 30,000-70,000 रुपये होती है।

संबंधित लागतों के बावजूद, कोई भी बीमा कंपनी बाँझपन की लागत को कवर नहीं करती है। यह न केवल वित्तीय लागत है जिसका एक कपल भुगतान करता है बल्कि बाँझपन कपल के भावनात्मक स्वास्थ्य पर एक प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

प्र. आयुर्वेद में बाँझपन का समाधान क्या है?

आयुर्वेद का उद्देश्य बाँझपन के मूल कारण का इलाज करना है। यह देखा गया है कि आयुर्वेद बाँझपन के कारण का इलाज करने में सक्षम है और लगभग जिन 50-60 प्रति शत दंपतियों में फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) के लिए कोई नॉन-पैथोलॉजिकल (ग़ैर-रोगात्मक) कारण (जैसे मोटापा) होता है, वे आयुर्वेद उपचार के बाद कन्सीव (गर्भाधान) करने में सक्षम थे। पैथोलॉजिकल अवस्थाओं में जैसे कि ट्यूबल ब्लॉकेज, आयुर्वेद ने 20 प्रति शत सफलता दर दर्शाई है।

प्र. कन्सेप्शन (गर्भाधान) में आहार की क्या भूमिका है?

यदि एक कपल प्रेगनेंसी की प्लानिंग कर रहा है, तो आहार के संदर्भ में नीचे दिए गए बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:

  • क्रैश डाइट को ना कहें, अगर आप मोटे हैं।
  • स्वस्थ तरीक़े से वज़न कम करें।
  • महिला साथी को आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • ताज़े फल और सब्जियां खाएं|
  • मैक्रो (स्थूल) और माइक्रो (सूक्ष्म) पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें।

प्र. बाँझपन के कारण डिप्रेशन (अवसाद) से कैसे निपटें?

यदि आप बाँझपन से पीड़ित हैं तो सकारात्मक रहना महत्वपूर्ण है। किसी को इतनी जल्दी उम्मीद नहीं खोनी चाहिए और कुछ बिंदुओं पर विचार करना चाहिए, जैसे:

  • अपने स्त्रीरोग विशेषज्ञ से बात करें।
  • अपने डॉक्टर के साथ बने रहें।
  • काउंसलर (परामर्शदाता) की मदद लें।
  • नियमित रूप से प्रिस्क्राइब्ड टेस्ट्स (निर्धारित परीक्षणों) के लिए जाएं।
  • आराम करें और ध्यान करने का प्रयास करें।

प्र. आईवीएफ उपचार की चुनौतियाँ क्या हैं?

आईवीएफ एक नवीनतम मेडिकल टेक्नोलॉजी है, जो लाखों इनफ़र्टाईल (बाँझ) दंपतियों को शिशु कन्सीव (गर्भाधान) करने में मदद कर रही है। इस तकनीक में शामिल होता है मेल स्पर्म (नर शुक्राणु) और फीमेल ओवा (मादा डिंब) का एक कृत्रिम या प्रयोगशाला फ्यूजन (संलयन) और फिर मादा के यूटरस (गर्भाशय) में एम्ब्रीओ (भ्रूण) को फर्टिलाइज़ (निषेचित) किया जाता है। हालांकि, आईवीएफ की सफलता दर की गारंटी नहीं दी जा सकती है। आईवीएफ की कुछ जटिलताएँ हैं – आईवीएफ के बारे में समझना, आईवीएफ की पहुँच एक चुनौती है क्योंकि यह हर जगह उपलब्ध नहीं है, इससे दंपति पर वित्तीय बोझ पड़ता है और अंत में आईवीएफ की सफलता दर की गारंटी नहीं दी जा सकती।

प्र. गोद लेने की प्रक्रिया क्या है?

कपल को एडॉप्शन प्रोसेस (दत्तक प्रक्रिया) शुरू करने के लिए ऑनलाइन रजिस्टर करना होगा। इसके बाद, बच्चा सुरक्षित हाथों में जाए यह सुनिश्चित करने के लिए एडॉप्शन कमिटी (दत्तक समिति) एक होम सर्वे (गृह सर्वेक्षण) या पारिवारिक बैकग्राउंड टेस्ट (पृष्ठभूमि परीक्षण) करेगी। उसके बाद, माता-पिता को 3 रेफरल दिए जाते हैं और फिर आमतौर पर बच्चे को घर ले जाने हेतु औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए 20 दिन दिए जाते हैं। एक डॉक्टर और एक क़ानूनी एडॉप्शन एक्सपर्ट (दत्तक विशेषज्ञ) की उपस्थिति में बच्चे को परिवार को सौंप दिया जाता है।

प्रेगनेंसी प्लानिंग (गर्भावस्था नियोजन)

प्र. प्रेगनेंसी की प्लानिंग करने से पहले, स्त्रीरोग विशेषज्ञ को कैसे चुनना चाहिए?

अपने क्षेत्र में एक समृद्ध अनुभव और विशेषज्ञता रखने वाले, अच्छी साख वाले डॉक्टर को चुनना उपयुक्त है। अपने घर के पास वाले एक डॉक्टर को चुनें; डॉक्टर अच्छी सुविधाओं वाले अस्पतालों से एसोसिएटेड (संबद्ध) होना चाहिए, ताकि जब आप अस्पताल जाए तो डॉक्टर सभी आवश्यक उपकरणों के साथ उपचार करने में सक्षम होना चाहिए।

प्र. प्रेगनेंसी की प्लानिंग करने से पहले, किन-किन चिंताओं पर विचार किया जाना चाहिए?

जब कपल प्रेगनेंसी की प्लानिंग करने के बारे में सोचना शुरू करता है, तो यह महत्वपूर्ण है कि कपल के स्वास्थ्य को मापा जाए। किसी भी गंभीर जेनेटिक (आनुवंशिक) समस्याओं के लिए पारिवारिक इतिहास के बारे पूछा जाना चाहिए। यदि कपल एचआईवी, एसटीडी जैसे किसी गंभीर इन्फेक्शनों (संक्रमणों) से ग्रस्त है, तो उचित प्लानिंग और उपचार को नियोजित किया जाना चाहिए। रूबेला इन्फेक्शन के ख़िलाफ़ संभावित माँ को टीका लगाया जाना चाहिए। नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार लेने की सलाह दी जाती है।

प्र. प्रेगनेंसी कोच किसे कहते हैं?

यह भारत में एक नया कॉन्सेप्ट (अवधारणा) है। एक प्रेगनेंसी कोच कपल को प्रशिक्षित करता है और कुछ व्यायामों की सलाह देता है, खाने की आदतों का सुझाव देता है, और कपल को माता-पिता के रूप में फिट बनाने के लिए जीवनशैली में बदलावों के बारे में प्रशिक्षित करता है।

प्र. प्रेगनेंसी के ऐप्स कितने भरोसेमंद होते हैं?

अधिकांश ऐप्स जो प्रमाणित नहीं होते हैं, उन पर दी गई जानकारी भ्रामक हो सकती हैं। हालांकि, एक सुझाव है कि आवश्यक जानकारी के लिए सरकारी साइटों को रेफ़र किया जा सकता है। अच्छी किताबें खरीदें जैसे - व्हाट टू एक्स्पेक्ट व्हेन यू आर एक्सपेक्टिंग (जब आप गर्भवती हो, तो क्या उम्मीद करें)। आँख बंद करके किसी भी ऐप का अनुसरण न करें; हमेशा डॉक्टर या अच्छी वेबसाइटों पर भरोसा करें।

प्र. प्रेगनेंसी की प्लानिंग करते समय, ऑप्टिमम न्यूट्रीशन (इष्टतम पोषण) कितना होता है?

यह महत्वपूर्ण है कि प्रेगनेंसी के लिए शरीर को तैयार किया जाए। प्रेगनेंसी के बाद और प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को बहुत सारे बदलावों से गुज़रना होगा; स्वस्थ पोषण शरीर को उसी के लिए तैयार करता है। शराब और धूम्रपान को ना कहें और यहाँ तक कि पैसिव स्मोकिंग (निष्क्रिय धूम्रपान) को भी। सही अनुपात में मैक्रो (स्थूल) और माइक्रो (सूक्ष्म) पोषक तत्वों का सेवन करें। सामान्य तौर पर, आहार में कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, मिनरल और विटामिन सही मात्रा में होना चाहिए।

प्र. प्रेगनेंसी की प्लानिंग में मन और शरीर की क्या भूमिका होती है?

प्रेगनेंसी की प्लानिंग के लिए एक समन्वित मन और शरीर आवश्यक है। भावनात्मक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आपके बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है। एक स्वस्थ जीवनशैली को नियोजित करना चाहिए, संतुलित भोजन खाना चाहिए, लगभग 7-8 घंटे पर्याप्त आराम करना चाहिए और पर्याप्त व्यायाम करना चाहिए। ध्यान और योग बहुत मदद करते हैं, वर्क-लाइफ बैलेंस (कार्य-जीवन संतुलन) बनाने का प्रयास करें। चिंता को कम करने के लिए श्वास-केंद्रित व्यायामों को आज़माए।

मिसकैरिज (गर्भपात)

प्र. मिसकैरिज (गर्भपात) क्या है?

20 सप्ताह के कन्सेप्शन (गर्भाधान) तक की प्रेगनेंसी का प्राकृतिक टर्मिनेशन (ख़ात्मा) गर्भपात है। इसका कारण या तो माता में या फीटस (भ्रूण) में मौजूद कोई दोष हो सकता है। यदि फीटस (भ्रूण) में कुछ जन्मजात असामान्यता है या माता के कुछ हार्मोनल दोष हैं, उदाहरणार्थ प्रोजेस्टेरोन की कमी, खराब प्लेसेनटेशन (बीजांडासन-निर्माण) उदाहरणार्थ फाइब्रॉएड में, कुछ इम्यूनोलॉजिकल (प्रतिरक्षात्मक) दोष उदाहरणार्थ माँ को खुद के फीटस (भ्रूण) से एलर्जी हो जाना या सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) या यूटरस (गर्भाशय) पर ट्रॉमा (अभिघात), गर्भपात के कारण बन सकते हैं।

प्र. गर्भपात से निपटना?

गर्भपात पश्चात् डिप्रेशन (अवसाद) से निपटने के लिए एक साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) की मदद लें। काउंसिलिंग सेशन (परामर्श सत्र) के दौरान साइकोलॉजिस्ट आपको तेज़ी से वापस ठीक होने में मदद करेगा। सकारात्मक रहें और अपने आप को यह बताएँ कि आपके शरीर को तैयार होने और बच्चा पैदा करने के लिए कुछ और समय की आवश्यकता हो सकती है। अपने समय को ठीक होने के लिए कुछ समय दें और दूसरी प्लानिंग करने से पहले अपने टेस्ट्स (परीक्षण) अच्छी तरह से करवा लें।

प्र. महिलाओं पर गर्भपात के क्या प्रभाव होते हैं?

वैसे तो गर्भपात के बाद शरीर ज़्यादा बदलावों से नहीं गुज़रता। समय पर पता लगना और आराम करना तेज़ी से ठीक होने में मदद करता है। हालांकि, अधिक समय तक आराम करने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि यह बहुत आवश्यक नहीं है। यदि माता को बहुत अधिक ब्लड लॉस (रक्त बहना) होता है तो ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त आधान) की आवश्यकता पड़ सकती है।

प्र. गर्भपात के लक्षण क्या हैं?

कुछ लक्षण हैं-

  • खून बहना।
  • अल्ट्रासाउंड का प्रेगनेंसी के विकास को नहीं दर्शाना।
  • भूरे रंग का डिस्चार्ज (स्राव)।
  • पहली तिमाही में उलटी और मतली का ग़ायब होना।

लक्षण दर्द-रहित या दर्द-मुक्त हो सकते हैं।

प्र. गर्भपात और जेनेटिक्स (आनुवांशिकी)?

गर्भपात का संबंध जेनेटिक्स (आनुवांशिकी) से सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि एक ही परिवार या क़रीबी रिश्तेदारों से शादी करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, गर्भपात से निपटने में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, एक सहयोगी साथी डिप्रेशन (अवसाद) से निपटने में मदद करता है।

प्र. गर्भपात के बाद पोषण?

आराम के साथ-साथ सही आहार लेना ज़रूरी है। प्रोटीन से भरपूर आहार फायदेमंद होता है। सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन, विटामिन और मिनरल का सेवन करें। फल, सब्ज़ियाँ, घी और मक्खन सही मात्राओं में शामिल करें। ओमेगा 3 से शरीर को सप्लीमेंट (अनुपूरक) करने के लिए जैतून का तेल और मछली का तेल लें।

प्र. क़ानूनन अबॉर्शन के पैरामीटर (प्रचाल) क्या हैं?

आप अबॉर्शन का विकल्प चुन सकते हैं यदि यह एक कॉन्ट्रासेप्शन (गर्भनिरोधक) विफलता है, जन्मजात असामान्यता है या यह माता या शिशु का जीवन ख़तरे में है। अपने स्त्रीरोग विशेषज्ञ से कंसल्ट करें और इसे सही तरीक़े से प्लान करें।

प्र. गर्भपात को कैसे प्रिवेंट किया जाए?

गर्भपात से बचा जा सकता है। आज एक जटिल दुनिया है जो कई समस्याओं को जन्म देती है। अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना गर्भपात को रोकने में बेहद महत्वपूर्ण है। मानसिक तनाव न लें, पर्याप्त आराम करें और प्रेगनेंसी के दौरान कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें।

प्र. गर्भपात के बाद शिशु को कब प्लान (नियोजित) करें?

दूसरे बच्चे को प्लान करने से पहले कम से कम 3 महीने इंतजार करना उपयुक्त है; यह प्रेगनेंसी के लिए शरीर को फिर से तैयार करने में मदद करता है। यदि गर्भपात किसी विशेष कारण से हुआ हो, तो अपने डॉक्टर से पूछें और कारण का उपचार करें। इस दौरान रिलैक्स करें और एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखें।

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