सातवाँ महीना

seventh month of pregnancy

सातवाँ महीना of Pregnancy

प्रेगनेंसी के सिर्फ तीन महीने शेष रहने पर, सातवाँ महीना अंतिम तिमाही की शुरुआत को मार्क करता है। इस अवधि के दौरान शिशु बहुत सक्रिय होता है और आसपास काफ़ी हिलता-डुलता है। इस महीने में पैदा हुए शिशुओं को प्रीमेच्यौर बेबी (अपरिपक्व शिशु) कहा जाता है और भले उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, पर वे निश्चित रूप से जीवित रह सकते हैं।

इन अंतिम महीनों के दौरान, माँ लगभग 4 किलो प्राप्त करती है, जो कि प्रेगनेंसी के कुल वज़न का लगभग 40 प्रति शत होता है।

माता में बदलाव  

  • पेट की जगह पर लाल स्ट्रेच मार्क्स (खिंचाव के निशान) दिखाई देने लग सकते हैं।
  • कभी-कभी इस समय के आसपास, फॉल्स कॉन्ट्रैक्शन (ग़लत संकुचन) (जिसे ब्रेक्सटन हिक्स के रूप में जाना जाता है) महसूस किए जाते हैं और भले वे बहुत दर्दनाक नहीं होते हैं पर वे भ्रामक हो सकते हैं।
  • माँ को एसिडिटी, अपच, दिल में जलन और क्रैम्प (ऐंठन) का अनुभव हो सकता है।
  • माँ विशाल महसूस करने लगती है और चीजों से टकरा सकती है। वह भुलक्कड़ बन सकती है या लेबर, चाइल्डबर्थ (प्रसूति) और शिशु के बारे में सपने देख सकती है। यह नींद में खलल पड़ने से या शिशु की हलचलों की वजह से हो सकता है।
  • जांघों, नितंबों और पेट के आसपास बढ़े हुए वज़न को देखा जा सकता है।
  • गर्भ का शीर्ष पेट और नाभि के आधे बीच में होता है।
  • इस समय के आसपास, स्तन के ऊपर की वेन्स (नसें) अधिक नोटिसेबल (नमूदार) हो सकतीं हैं।

शिशु की विशेषताएँ

  • लंबाई: 14.5 इंच
  • वज़न: 1 किलो
  • चेहरा और शरीर वर्निक्स से ढका होता है, जो वॉटर-प्रूफ करने वाले (जल-रोधक) एजेंट के रूप में काम करता है।
  • आँखों के ऊपर की सील हट गई है।
  • श्रवण शक्ति अच्छी तरह से विकसित हो गई है।
  • त्वचा लाल और झुर्रीदार होती है।
  • सात महीने का एक शिशु दर्द महसूस कर सकता है और बिल्कुल एक फुल-टर्म शिशु की तरह प्रतिक्रिया देता है।
  • त्वचा के नीचे फैट जमा होने लगता है।
  • टेस्ट बड्स (स्वाद कलियाँ) जन्म के समय से अधिक सुस्पष्ट होते हैं।
  • फेफड़े अभी भी मेच्यौरिटी (परिपक्वता) के स्टेज तक नहीं पहुँचें हैं।
  • इस समय के आसपास, अगर शिशु हिलता है और मुड़ता है, तो पैर के आकार को माता के पेट पर देखा जा सकता है।
  • यदि पिता शिशु की हलचलों को महसूस करने के लिए उत्सुक है, तो वे माता के पेट के ऊपर अपने हाथ से महसूस कर सकते हैं।
  • शिशु के दिल की धड़कन को एक साधारण फीटल (भ्रूणीय) स्टेथोस्कोप से सुना जा सकता है।

सुझाव

  • यदि आप एक कामकाजी महिला हैं, तो अपने पैरों को जितना और जब संभव हो सकें ऊपर रखने की कोशिश करें।
  • यह सुनिश्चित करें कि आपको दिन में पर्याप्त आराम मिल रहा है और रात को जल्दी सो जाएं।
  • एम्प्लॉयर (नियोक्ता) को लिखित रूप में बताएं कि आप कब अवकाश लेने का इरादा रखतीं हैं और डिलीवरी (प्रसव) के बाद आप काम पर कब वापस लौटेंगी।
  • अब से हर दो सप्ताहों में प्रसवपूर्व क्लिनिक का विज़िट करें।

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गर्भावस्था

आठवाँ महीना

eighth month of pregnancy

आठवाँ महीना वास्तव में एक रोमांचक समय होता है, क्योंकि अब तक शिशु पूरी तरह से बन चुका होता है। इस महीने के आसपास, बढ़े हुए वज़न के कारण, गर्भवती माता को काफ़ी थकान महसूस होने लगती है। यह महत्वपूर्ण है कि आप शांत रहें और जितना लें सकें उतना सारा आराम लें। प्रसवपूर्व कक्षाओं को जॉइन करना भी एक अच्छा विचार है।

इस महीने के अंत के दौरान, माँ का वज़न बढ़ना कम हो सकता है, भले शिशु तेज़ी से बढ़ रहा हो।

माता में बदलाव

  • यूरिन को पास करने की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) बढ़ जाती है। थोड़ा-सा यूरिन लीक (मूत्र रिसाव) करना बहुत आम होता है जब कोई खांसी या छींक आए।
  • उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • नींद डिस्टर्ब हो सकती है और इसकी वजह से माँ चिड़चिड़ी हो सकती है।
  • नाभि के आकार में बदलाव हो सकता है। कुछ के लिए यह बाहर निकलता है जबकि अन्य में यह चपटा हो जाता है।
  • पेल्विक एरिया (श्रोणि क्षेत्र) में असुविधा हो सकती है क्योंकि जन्म की तैयारी में जोड़ों का विस्तार हो रहा होता है।
  • पेट के नीचे दौड़ने वाली गहरी रेखा अधिक प्रमुख हो सकती है।
  • रिबकेज (पसली पिंजर) का तल दुःख सकता है क्योंकि गर्भ ऊपर की ओर दबाता है।
  • माता को ब्रेक्सटन-हिक्स कॉन्ट्रैक्शन (संकुचन) अधिक महसूस हो सकते हैं जो ऐसे लग सकते हैं कि आपके यूटरस (गर्भाशय) की ओर कुछ मजबूत बैंड टाइट किए जा रहें हैं, जिससे यूटरस कठोर महसूस होने लगता है।
  • आप शिशु की अधिक मजबूत लातों को भी अनुभव कर सकतीं हैं
  • आप रात जागरण का अनुभव कर सकतीं हैं क्योंकि आप रेम (REM) निद्रा का अनुभव कर सकतीं हैं - नींद की एक ऐसी अवस्था जिसमें आप अधिक सपने देखते हैं और अधिक आसानी से जाग जाते हैं। साथ ही, आपका बढ़ता हुआ यूटरस सोने में मुश्किल पैदा करता है।

शिशु की विशेषताएँ

  • लंबाई: 16 इंच।
  • वज़न: 1.6 किलो।
  • शिशु लगभग जन्म के समय जैसा दिखता है और उसे केवल अधिक वज़न और फैट प्राप्त करने की आवश्यकता है।
  • सिर अब शरीर के प्रपोर्शन में है (आनुपातिक है)।
  • चूंकि गर्भ में जगह कम होती है, तो आमतौर पर जन्म की तैयारी में सिर नीचे की मुद्रा में मुड़ जाता है।
  • शिशु प्रकाश और अंधेरे के बीच अंतर कर सकता है।

सुझाव 

  • यदि आप खांसते, छींकते आदि समय यूरिन लीक (मूत्र रिसाव) करते हैं, तो आपको अपने पेल्विस (श्रोणि) को मज़बूत करने की आवश्यकता होगी। पेल्विक फ्लोर (श्रोणीय तल) व्यायाम बहुत उपयोगी होते हैं और इनका नियमित रूप से अभ्यास करने में मदद करने के लिए आप अपने डॉक्टर या मिड वाइफ (प्रसाविका) से पूछ सकतीं हैं।
  • यदि आप अभी तक नहीं गए हैं, तो प्रसवपूर्व कक्षाओं में भाग लेना शुरू करें।
  • दिन के दौरान अपने पैरों को एक या दो घंटे के लिए ऊपर रखें।
  • अगर आपको नींद आने में परेशानियाँ हो रहीं हैं, तो श्वास और विश्राम की तकनीकों की मदद लें।
  • एनीमिया या नेगेटिव ब्लड ग्रुप (नकारात्मक रक्त समूह) समस्याओं की जांच के लिए ब्लड टेस्ट (रक्त परीक्षण) करवाएं।
  • शिशु के लिए बुनियादी आवश्यक चीज़ें खरीदें, जिसमें शामिल हो सकते हैं।
  • एक कैरी कॉट (साथ ले जानेवाली खाट)।
  • एक कंबल
  • बिस्तर
  • कार की सीट
  • बाथ टब
  • तौलिए
  • नैपी (लंगोट)
  • बोतल से खिलाने वाले उपकरण
  • वेस्ट (बनियान)
  • कार्डिगन (एक प्रकार का स्वेटर)
  • जम्पसूट
  • नाईट सूट
  • मोज़े
  • हैट (टोपी)

बहुत अधिक न सोचें या बहुत अधिक तनाव न लें और जितना संभव हो उतना आराम करने की कोशिश करें। जैसे और जब संभव हो नींद पूरी कर लें, क्योंकि एक बार शिशु के घर आने पर यह एक दुर्लभ चीज़ बन जाएगी।

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तीसरा महीना

the third month of pregnancy

तीसरे महीने का अंत पहली तिमाही के ख़त्म होने का संकेत देता है और यह प्रेगनेंसी की घोषणा करने का सही समय माना जाता है क्योंकि माता में असुविधा के शुरुआती लक्षण समाप्त होने लग जाते हैं।

शारीरिक बदलाव

  • मॉर्निंग सिकनेस (सुबह की बीमारी), मतली और उलटी समाप्त होने लगते हैं।
  • पेशाब की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) में गिरावट होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान धीमी गति से मल त्याग के कारण कब्ज के लक्षण हो सकते हैं।
  • हार्मोनल परिवर्तन से मूड स्विंग हो सकते हैं।
  • शरीर में ब्लड सर्कुलेशन (रक्त परिसंचरण) का वॉल्यूम बढ़ जाता है, जिससे माता के फेफड़ों, किडनियों और हृदय पर बोझ बढ़ जाता है।
  • स्तनों में भारीपन और कोमलता बढ़ जाती है।
  • भले माता के शरीर के आकार में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं होगा, वूम्ब (गर्भ) के शीर्ष को प्यूबिक बोन (जघन की हड्डी) के ठीक ऊपर महसूस किया जा सकता है।

माँ का वज़न बढ़ना

इस समय के आसपास, माँ को प्रेगनेंसी के कुल वज़न का लगभग 10 प्रति शत प्राप्त करने की उम्मीद है, जो लगभग 1.2 किलो होगा। यदि होनेवाली माँ मतली और मॉर्निंग सिकनेस (सुबह की बीमारी) का सामना करती है, तो वज़न का बढ़ना काफ़ी कम हो सकता है।

शिशु की लंबाई और वज़न

शिशु अब लगभग 2.5 इंच बड़ा हो गया होगा और उसका वज़न लगभग 18 ग्राम होगा।

शिशु की विशेषताएँ

  • बाहरी कान अच्छी तरह से विकसित हो गए हैं।
  • छोटी-छोटी उंगलियाँ और पैर की उंगलियाँ बन गईं हैं।
  • शिशु बहुत अधिक मानवीय दिखता है।
  • सिर अभी भी शरीर के अनुपात में बड़ा है।
  • अंग छोटे हैं, हालांकि पूरी तरह से बन चुके हैं ।
  • वह फ्लूइड (तरल पदार्थ) को चूस और निगल सकता है जो उसे घेरे हुए है।
  • वह यूरिन पास कर सकता है।
  • पलकें विकसित हो गईं हैं और आँखों के ऊपर बंद हैं।
  • छोटे-छोटे नाखून और पैर के नाखून बढ़ रहे हैं।

प्रेगनेंसी टिप्स

  • इस चरण में सीधे खड़े होने की आदत डालें क्योंकि यह आपके शरीर को प्रेगनेंसी के बाद के चरणों में स्थिर तरीक़े से अतिरिक्त वज़न उठाने के लिए तैयार करेगा।
  • प्रसवपूर्व क्लिनिक में अपनी पहली विज़िट करें जहाँ डॉक्टर और मिड वाइफ (प्रसाविकाओं) द्वारा रूटीन टेस्ट्स किए जाते हैं यह जाँचने के लिए कि प्रेगनेंसी सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है।
  • यदि आप कब्ज से पीड़ित हैं तो अपने डॉक्टर को अवश्य सूचित करें और आहार में बहुत सारा पानी और उच्च फाइबर फूड शामिल करें।
  • ऐसी ब्रा खरीदें जो स्तनों को पर्याप्त सहारा दे।

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