कैंसर को समझना

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A Cancer diagnosis is dreaded and feared yet rarely understood. Even as cancer cases in India and across the world are poised to grow, there continues to be a sense of mystery around it with very little understanding of the causes and cures for an ailment commonly referred to as the Big ‘C.’ A cancer diagnosis is typically followed by intense periods of anxiety, stress, and fear for the patient as well as a caregiver. Cancer fighters recall feelings of shock followed by anger and denial when their cancer is first discovered mostly because of the myths surrounding it.
The questions abound and range from “How can this happen to me?” to “I don’t have any bad habits so why me?” and is inevitably followed by that looming unspoken query, “Can I survive this?” While these questions besiege patients and caregiver, Doctors, Oncologists and Cancer support groups reassure us that a cancer diagnosis is not a death sentence. Given the right circumstances, one can control and even conquer Cancer. Accurate information and a better understanding about Cancer will certainly help reduce negativity around it so that it can be treated like other health conditions. ‘Cancer fighters’ and ‘Cancer thrivers’ have shared their journey with us in the course of this research and echoed the importance of the right information and a stress-free frame of mind to get through the long drawn treatment and overcome the Big ‘C’.

क्या आप जानते थे?

The Greek word ‘Oncos’ and ‘Carcinos’ are attributed to Hippocrates and refer to a ‘benign swelling’ and a ‘malignant swelling’ respectively.

कैंसर क्या है?

Cancer, a word surrounded by much fear and plenty of uncertainty, refers to an uncontrolled growth of cells that invade and damage normal tissue. These cells may form a mass called ‘tumor’ which could be malignant or benign. A malignant tumor grows and spreads to other parts of the body while a benign tumor could grow but won’t spread.

के लक्षण

Cancer typically distorts normal organs, nerves and blood vessels causing symptoms related to that specific body part. One of the first places that cancer spreads is the lymph nodes – those bean-shaped organs located in clusters in the neck, groin and under the arms.

भले बुखार, थकान और वज़न घटने जैसे सामान्यीकृत लक्षण उन कैंसरों में आम हैं जो अपने उत्पत्ति के स्थान से परे फैल गए हैं, यह कैंसर का आकार और आक्रामकता है जो इसके लक्षणों को निर्धारित करता है।

कैंसर के प्रकार

  • कार्सिनोमा – These are the most common type of cancer and begin in the skin or the tissue that covers the surface of internal organs and glands. Carcinomas usually form solid tumors.
  • सार्कोमा – These begin in the tissues that support and connect the body. A sarcoma can develop in fat, muscles, nerves, tendons, joints, blood vessels, lymph vessels, cartilage, or bone.
  • ल्यूकेमिया – These are cancer of the blood and begin when healthy blood cells change and grow uncontrollably.
  • लिम्फोमा – This is cancer that begins in the lymphatic system. The lymphatic system is a network of vessels and glands that help fight infection.

रिस्क फैक्टर (जोखिम कारक)

भले ही कैंसर के 75 प्रति शत से अधिक मामले 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में डायग्नोज़ किए जाते हैं, अकेली बढ़ती उम्र कैंसर के लिए रिस्क फैक्टर नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि 5 से 10 प्रति शत कैंसर जेनेटिक रूप से विरासत में मिलते हैं और वे कैंसर जीवन में प्रारंभ में आने लगते हैं।

रिस्क फैक्टर में शामिल हो सकते हैं जेनेटिक्स (आनुवांशिकी) (बीआरसीए जीन, उदाहरण के लिए), जीवनशैली (जैसे धूम्रपान, आहार और धूप से टैन होना), पर्यावरणीय अनावरण या हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति। वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन से भी कुछ कैंसर हो सकते हैं, जैसे कि लीवर कैंसर में हेपेटाइटिस वायरस, पेट के कैंसर में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी और सर्वाइकल कैंसर में एचपीवी वायरस।

कैंसर के स्टेज

स्टेज 0: इस स्टेज पर कैंसरों की पहचान उस स्थान के अनुसार की जाती हैं, जहाँ वे शुरू में उभरे थे और गुना हुए थे, तथा परिणामस्वरूप ट्यूमर पास के टिश्यूज़ में नहीं फैला होता है। स्टेज 0 कैंसर का प्रोग्नोसिस (रोगनिदान) होना बहुत अच्छा है और इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देने से कैंसर उलट सकता है।

स्टेज 1: Small cancerous tumors may have spread to nearby tissue but not beyond, such as the bloodstream or lymph system. “Early stage” cancer prognosis is also quite good with healthy changes preventing its return.

स्टेज 2 और 3: “Regional spread” indicates that cancer has expanded and embedded into the surrounding tissue. Even though this stage may cause concern, cancer has not spread to other organs in the body.

स्टेज 4: When cancer spreads from the initial site to other organs or areas of the body, it is referred to as “distant spread” cancer, advanced cancer, or metastatic cancer. Metastasis refers to the spread of cancer cells from the place where they first formed to another part of the body.

क्या आप जानते थे?
भले कैंसर से इतना सारा डर जुड़ा हुआ है, आँकड़े पूरी तरह से निराशाजनक नहीं हैं।
1. पूरी दुनिया में कैंसर से डायग्नोज़ हुए लगभग 70% लोग पाँच साल से अधिक समय तक जीवित रहते हैं।
2. बचपन के कैंसर के 85% से अधिक मामले इलाज योग्य हैं।
3. यहाँ तक कि सबसे प्रतिरोधी कैंसर, जैसे मेलनोमा, इम्यून-मोड्यूलेटिंग (प्रतिरक्षा-आपरिवर्ती) उपचारों का जवाब देते हैं।


Cancer survivors often battle stigma that can be removed through awareness. Noted oncologist Dr Amish Vora of HOPE Oncology clinic in New Delhi cautions against ‘Cancerism’ which is worse than racism and sexism as it is tough to pinpoint. “Cancer is not infectious yet people avoid those who are diagnosed with it and patients often find it difficult to socialize. They may be discriminated against during job interviews or even in relationships,” explains Vora.

फैक्ट शीट (तथ्य पत्रक)

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सबसे आम प्रकार के कैंसर जो पुरुषों को फ्रीक्वेंसी के क्रम में मारते हैं, वे हैं लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर), पेट का कैंसर, लीवर कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर (मलाशय कैंसर) और ईसोफेगल कैंसर (ग्रसिका कैंसर)। डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि पाँच सबसे आम कैंसर जो महिलाओं को फ्रीक्वेंसी के क्रम में मारते हैं, वे हैं स्तन कैंसर, लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर), पेट का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर (मलाशय कैंसर) और सर्वाइकल कैंसर (गर्भग्रीवा कैंसर)। विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ (कर्नल) आर रंगा राव के अनुसार, भारत में हर साल 17 लाख नए मरीज़ कैंसर से डायग्नोज़ होते हैं, जो चीन और अमेरिका के बाद कैंसर के मामलों में तीसरे स्थान पर हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन रिसर्च (एनआईसीपीआर) के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर से नई-नई डायग्नोज़ हुई हर दो महिलाओं में, देश में एक महिला की उससे मृत्यु हो जाती है, और लगभग आधी मिलियन मौतें बीमारी के बारे में अज्ञानता के कारण होती हैं। भारत में हर 8 मिनट में एक महिला की सर्वाइकल कैंसर (गर्भग्रीवा कैंसर) से मृत्यु हो जाती है। लगभग एक तिहाई कैंसर तम्बाकू के इस्तेमाल के कारण होते हैं जबकि शराब और तम्बाकू मिलकर मौखिक और अन्य कैंसरों के विकसित होने के उच्च जोखिम पैदा करते हैं।

Globocan’s worldwide data states says that there were 14.1 million new cancer cases, 8.2 million cancer deaths, and 32.6 million people living with cancer within 5 years of diagnosis in 2012. 57% (8 million) of those new cancer cases, 65% (5.3 million) of the cancer deaths, and 48% (15.6 million) of the 5-year prevalent cancer cases occurred in the less developed regions. The overall age-standardized cancer incidence rate is almost 25% higher in men than in women with rates of 205 and 165 cases per 100 000 person-years, respectively.

एंटी-कैंसर डाइट (कैंसर-विरोधी आहार)

खाने का रोगों से एक महत्वपूर्ण संबंध है और (कीमोथेरेपी के दौरान) कैंसर को प्रिवेंट करने या उससे लड़ने के लिए इम्युनिटी के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के परिणामस्वरूप प्लांट-बेस्ड (वनस्पति-आधारित) आहारों पर शोध हुआ है जो कैंसर को प्रिवेंट करने में मदद करते हैं। कुछ वनस्पति के केमिकल सीधे तौर पर कैंसर सेल्स से लड़ते हैं, जबकि अन्य कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए एक स्वस्थ इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देते हैं। फल, सब्ज़ियाँ, चॉकलेट, चाय, और वाइन को फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इनमें पॉलीफेनोल होते हैं। फ्लेवनॉइड और करोटिनॉइड से युक्त मसाले और जड़ी-बूटियाँ भी ऑक्सीकरण और सूजन को कम करतीं हैं और वे इस प्रकार कई लाभ प्रदान करतीं हैं।

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