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कोलिक (उदरशूल)

यह हवा के कारण पैदा हुआ एब्डोमेन (उदर) में एक गंभीर दर्द होता और विशेष रूप से शिशु इससे पीड़ित होते हैं।

To relive from pain follow these steps:-

  • अपने पेट पर या गोद में, पेट के बल अपने शिशु को लेटाएं। मुद्रा में बदलाव करने से कुछ कोलिकी शिशुओं (अर्थात् उदरशूल से पीड़ित शिशुओं) को शांत करने में मदद मिल सकती है। आप अपने शिशु की पीठ को भी रगड़ सकते हैं, जो दोनों, सुखदायक होता है और गैस को पास कराने में भी मदद कर सकता है।
  • उसे एक पैसिफायर (प्रशांत करने का एक उपकरण) प्रस्तुत करने के बारे में विचार करें, या शिशु के मुंह में कोमलतापूर्वक उंगली डालकर उसे उसकी उंगली को चूसने के लिए प्रोत्साहित करें। गैस की वजह से कोलिक (उदरशूल) नहीं होता है, लेकिन कुछ कोलिकी शिशु गैस की समस्या से पीड़ित होते हैं, क्योंकि वे रोते समय हवा निगल लेते हैं। दूध पिलाने के दौरान शिशु को सीधा रखें, और गैस के दर्द को कम करने के लिए अकसर उसे डकारने के लिए थपथपाएं।
  • एक शिशु जिसे कोलिक (उदरशूल) है, वह अकसर हर दिन लगभग एक ही समय पर रोता है, आमतौर पर दोपहर के बाद या शाम को। किसी भी दिन कोलिक के एपिसोड कुछ मिनट से तीन घंटे या उससे अधिक तक रह सकते हैं।
  • generally recommend starting out with a traditional cow’s-milk formula, such as Enfamil and Similac, which contain a blend of whey and casein proteins. While the majority of infants do fine on these, colicky babies sometimes benefit from a different variety.
  • उसे कंगारू-शैली में चलाएं।
  • अच्छे वाइब्रेशन (कंपन) करें।
  • उसे स्वॉडल करें (अर्थात् कसकर लपेटें)।
  • उसकी मालिश करें।
  • बाहर की उत्तेजना कम करें।

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मीज़ल्स से निपटना

मीज़ल्स (खसरा) एक अत्यंत कंटेजियस (संक्रामक) इन्फेक्शन है जो मीज़ल्स के वायरस के कारण होता है। प्रारंभिक संकेतों और लक्षणों में आमतौर पर बुखार, अकसर 40° C (104.0° F) से अधिक, खाँसी, बहती नाक और सूजन वाली आँखें शामिल होते हैं। लक्षणों की शुरुआत के दो या तीन दिन बाद, मुंह के अंदर छोटे सफेद स्पॉट (धब्बे) आ सकते हैं, जिन्हें कोप्लिक के स्पॉट (धब्बों) के रूप में जाना जाता है।

  • एक बहती या बंद नाक।
  • छींकना, पानी वाली आँखें और सूजी हुई पलकें।
  • लाल आँखें जो प्रकाश के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं।
  • एक उच्च तापमान जो 40°C (104°F) तक जा सकता है।
  • मुंह में छोटे-छोटे ग्रे रंग के सफेद स्पॉट (धब्बे)।
  • पीड़ा एवं दर्द।
  • खाँसी और भूख न लगना।
  • थकान, चिड़चिड़ापन और ऊर्जा की सामान्य कमी।

साइनसाइटिस से पीड़ित व्यक्ति का इलाज कैसे कैरे ?

मीज़ल्स का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, लेकिन आमतौर पर 7 से 10 दिनों के भीतर स्थिति में सुधार हो जाता है। स्कूल या काम से कम से कम चार दिन दूर रहें।

यदि मीज़ल्स के लक्षण आपके या आपके शिशु के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं, तो कुछ चीज़ें हैं जो आप कर सकते हैं इनका इलाज करने लिए, जब तक आप प्रतीक्षा करते हैं अपने शरीर द्वारा वायरस से लड़ने के लिए।

डॉ मे एक उच्च तापमान (बुखार) को कम करने के लिए और यदि आपके बच्चे को असहज महसूस हो रहा हो तो किसी भी दर्द या पीड़ा से राहत के लिए कुछ दवा की सलाह देते हैं।

यदि आपके शिशु का तापमान अधिक है, तो सुनिश्चित करें कि वे बहुत सारे फ्लूइड (तरल पदार्थ) पीते रहें हैं क्योंकि उन्हें डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) का ख़तरा हो सकता है।

वैक्सीनेशन (टीकाकरण):

मीज़ल्स, मम्प्स (कण्ठमाला) और रूबेला (एमएमआर) वैक्सीन नियमित रूप से 12 से 15 महीने की उम्र में दी जाती है, इसके बाद 4 से 6 साल की उम्र में स्कूल में प्रवेश करने से पहले एक बूस्टर शॉट लगाया जाता है।

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